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Friday, 12 April 2019

चाळकनेची आवङ वंदना**

**चाळकनेची आवङ वंदना**
*बाढाणे बङ देस में,चाळकनो इक गाम।
धोरा धूणी तापता,आवङ माँ रो धाम।।1।।
*कैर कंकैङी बोरङी,खैजङ जाळ वणीह।
आवङ मावङ चारणी,धोरा धाप धणीह।।2।।
*सिन्ध में रहता साहुवा,कुळ चारण कविराय।
मांड बसाई मावङी,थळवट धोरा मांय।।3।।
मादा रा सुत मामङा,सगत भगत हिंगळाय।
सगत पीढ हद सांतरो,सिन्ध बलुचा मांय।।4।।
*बंड सेठ इक बांठियो,मामङ मोसो दीन।
पुत्र विहुणा पांपळा,कांई करणो जीण।।5।।
*भरम भगत रा राखजो,लिजिय राखो मात।
सात फैरा दूं सांवठा,हिंगलाज रे जात।।6।।
*माता मन ममता घणी,मात सुणी आ बात।
इक देवूंला डीकरो,धीवङिया दूं सात।।7।।
*मामङ साहुवा मांड रा,आवङ माँ घर आय।
*मोहवरती मेहङु चारणी,गोद खिलावे माय*।।8।।
*विकरम संवत विचारणा,अठ सौ ऊपर आठ।।
चेत सुदा मंगळ नमी,मात उतरिया धाट।।9।।
*चाळक दाणु चालियो,सिंध धरा सूं धाय।
सिर धङ सूं सळटावियो,आवङ मायङ आय।।10।।
*आवङ थारो आसरो,धोरा मांही धाम।
चाळकनेची चाव सूं,सिमरो आठू याम।।11।।
*चाळकनेची चानणो,थलिया धोरा मांय।
भगता थां सूं विणती,दरसण करियो आय।।12।।
*मनरंगथळ री मावङी,मनङो रंग दे मात।
भगती तो भरपूर दे,करले आत्मसात।।13।।
आवङ माँ आशीष दे, और न चहिये मोय।
दया हरदम दाखिये,दास ज हूं म्है तोय।।14।।
*चाळकनो चावो कियो,अम्बे मायङ आप।
मनरंगथळ मरुथळ सथल,जपै उदियो जाप।।15।।
रचयिता:-उदयराज खिलेरी अध्यापक राउमावि सेसावा
जालोर
9828751199

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Monday, 25 September 2017

चरण मोहि राखो चालकनेज,

कुल देवी श्री चाळराय के श्री चरणों में
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

चरण मोहि राखो चालकनेज,
शरण तव छोरु जी हमेश।। टेर।।
विविध वृद ज्यूंही मो धारो,
चरण रो दीज्यो माँ सहारो।
कुपात्र जाण कर काँई,
मात न पूत मन मारयो।
उबारो आप रो जन देख,
चरण मोहि राखो चालकनेज      ।।१।।
मति गति तू ही महामाई,
सकल संसार सकलाई।
विपत में याद तू आई,
बुद्धि दी पहले भरमाई।
दाता आप दो मो देश,
चरण मोहि राखो चालकनेज
।।२।।
ध्यान दो ग्यान दो धाता,
विमल जस की तू उपजाता।
सकल संसार की सरनी,
त्रिविध जग ताप की तरनी।
करम गति रेख को ना देख,
चरण मोहि राखो चालकनेज।।३।।
भणे "देव" ज्ञान भिखारी,
जता सह सिक्षा जगवारी।
महड़ू कुल की महतारी,
चरण थिर आ पड्यो थारी।
जनम के दोस को ना देख,
चरण मोहि राखो चालकनेज।। ४।।

रचित
देवराज सिंह जाड़ावत
ठिकरिया कविराय
बूंदी

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माँ महामाया करणी जी महाराज की आरती श्री चरणों में

माँ महामाया करणी जी महाराज की आरती श्री चरणों में
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
*राग /तर्ज आरती कुन्ज बिहारी की* हरी ओम शरण album प्रेमांजली पुष्पांजलि

आरती मेह दुलारी की, जयति सज्जन भय हारी की।। टेर।।

जयति जय धन जंगल धरणी,
चरित किये अमिट जहाँ करणी।
तारणी ताप हारणी श्राप,
जयति जय जय अघ हरणी की।।१।।
आरती मेह दुलारी की.....
मात तुम ज्ञानवंत गीता,
निमिष में अखिल विश्व जीता।
क्रूर किये दूर भक्त भरपूर,
जयति जय जय श्रुति बरणी।।२।।
आरती मेह दुलारी की.......
मात तुम गोधन हितकारी,
अमिय जन लीला विस्तारी।
अधम खल मेट स्वजन हित हेत,
जयति जय लोवड वरणी की।।३।।
आरती मेह दुलारी की.....
मात तुम मलेच्छन कीने दूर,
राष्ट्रकुल थरपे धरणी पुर।
विमल जस जोर फिरी चहुं और,
जयति जय करुणा करणी की।।४।।
आरती मेह दुलारी की......
मात तुम सेवक हित धाईं,
पूर्ण की सबकी मन चाईं।
बणिक की बेर शेख की टेर,
जयति जय संभल वरणी की।।५।।
आरती मेह दुलारी की......
मात तुम चारण कुळ तरणी,
धरणी जन *देव* सदा बरणी।
दया की धाम माँ पूरण काम,
जयति हिय पावन करणी की।।६।।
आरती मेह दुलारी की.......
🌹🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹🌹

रचित
ठा. सा. देवराज सिंह जाड़ावत
ठिकरिया कविराय
जिला बूंदी (राज.)

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Sunday, 30 July 2017

बाढाणा बड़ देश में,चालकनो इक गाम

बाढाणा बड़ देश में,चालकनो इक गाम।
धौरा धुणी तापता,आवड़ मां रो धाम।।

कैर कंकैड़ी बौरड़ी,खैजड़ जाळ वणीह।
आवड़ मावड़ चारणी,धौरा धाट धणीह।।

सिन्ध में रहता साहूवा,चारण कुळ कविराय।
मांड बसाई मावड़ी,थलवट धौरा मांय।।

मादा रा सुत मामड़ा,भगत सगत हिंगलाय।
सगत पीठ इक सांतरौ,सिन्ध बलुचा मांय।।

बण्ड सैठ इक बांठियौ,मामड़ मौसो दीन।
पुत्र विहुणा पांपळा,कांई करणौ जी'ण।।

भरम भगत रा राखजौ,लिजिया राखौ मात।
सात फैरा दिया सांवठा,हिंगलाज के जात।।

माता मन ममता घणी,मात सुणी आ बात।
इक देवुंला डिकरौ,धिवड़ियां दूं सात।।

मामड़ साहुवा मांड रा,आवड़ मां घर आय।
मौहवरती मेहड़ु चारणी,गौद खिलावै माय।।

विकरम संवत विचारणा,अठ सौ ऊपर आठ।
चैत सुदा मंगळ नम,मात उतरिया धाट।।

चाळक दाणू चालियौ,सिन्ध धरा सूं धाय।
सिर सूं धड़ सळटावियौ,आवड़ मायड़ आय।।

आवड़ थारौ आसरौ,धौरा मांही धाम।
चाळकनैसी चाव सूं,सिमरुं आठौ याम।।

चाळकनैसी चानणौ,थळिया धौरा मांय।
भगता थांसूं विणती,दरसण करियौ आय।।

....................
जय माताजी
जय चालकनेची माँ।

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Friday, 10 March 2017

चारण समाज ही नहीं सभी शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय

चारण समाज ही नहीं सभी शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय

चारण समाज ही नहीं सभी शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषयरण समाज ही नहीं सभी शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में वित्तीय वर्ष 2017-18 के  लिए घोषित बजट में चालकना में मातेश्वरी का पैनोरमा निर्माण कराये जाने की घोषणा की गई है।
   इस घोषणा के प्रैरणा स्रोत हमारे समाज के गौरव राजस्थान
धरोहर संरक्षण एवं प्रौन्नति प्राधिकरण  के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह लखावत  है।
    इस पैनोरमा में मातेश्वरी का इतिहास ड्राविंग,पेंटिंग, आडियो,विडीयो,पुस्तकों आदि द्वारा भक्तों को सुलभ होगा।
   इस कार्य के लिए चारण समाज राजस्थान की यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमति वसुंधरा राजे सिंधिया और ओंकार सिंह जी लखावत का आभारी है।
    हम सभी को निम्न संपर्क सूत्रों से कृतज्ञता अभिव्यक्त करनी चाहिए:-
​Cmo ro mail​
*​01412227656​*
*​cmrajasthan@nic.in​*
*vasundhararajeofficial@gmail.com​*

*✍भवरदान चारण  9913083073​*
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Tuesday, 28 February 2017

चाळराय चाळकनेची रो डिंगळ गीत - कवि केसरदानजी खिडिया*

  
चाळराय चाळकनेची रो डिंगळ गीत – कवि केसरदानजी खिडिया

     *॥गीत – प्रहास साणोर॥*

चरै  मां  संदशा  करै डसण विधि   चोगणी,
      खसण विध नोगणी धरै खूनां।
सोगणी   खितारै  धाक  चढि  आसुरां,
     
    जोगणी चितारै वयण जूनां॥1॥

आज   म्है  आविया  माढ  पग   अबरखे,
      डबर कै छांडि पग मती डागो।
दीसहत   खबर  कै  घणो  जग   देखसी,
      बीसहथ जबर कै देखि बागौ॥2॥

कवळ   कतळावियो  जेम  खाटक   करै,
      जिको अतळावियो केम जावै।
मात   बतळावियो   बोलियो   मातसूं,
    मेछ पतळावियो कठे मावै॥3॥

मात   हिंगळाज   सूं  अकर  चढ  मकरियो,
      चकरि चढ हकरियो रुधिर चगतो।
बिकट   चसमांण   जमदूत   गत   बकरियो,
    डकरियो गजब असमाण डिगतो॥4॥

हाँक   नवलाख   री  हेक  जिम  हुचकै,
     थिरत भव लाखरो हेक थायो।
आप   सब   लाखरो  रुप कर  आहुडै,
     इतै नवलाख रो रुप आयो॥5॥

मेछ  डंड  कड़ड़  नासा ठड़ड़  हड़ड़ मुख,
      ब्रह्म पुड धड़ड़ गज गड़ड़ बागो।
धूत  पत  तनिक  जिम जड़ड़ खंच शूळ धर,
     भूतपत धनक जिम बड़ड़ भागो॥6॥

पाट   तौ   तणां  विरद  किसूं केहर पुणै,
      थाट पत तणां ब्रद सथर थाया।
चाळकै    दैतनूं     मारियो    चंडिका,
    रुप थाहरा नमो चाळराया॥7॥

    *कवि केसरदानजी खिडिया*
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आरती जय मां चालराय

                            आरती
                   *जय मां चालराय*

कुळदेवी मंगळ याद करुं छुं याद करुं त्यां आवजे.
विपदा विडारण धर्म धारण जरा वार न लावजे.
देवी दयाळी मेहर करजे भांगे दुःख तुं भासती .
कुळदेवी मंगळ मात चालराय आजे उतारुं  आरती.... 1
समर जीत देवणी देवी दैत्य तुं संहारती .
धरा तणो पाप वध्यो तुं ही क्षिण उबारती.
धर रुप अनेक देवी तुं तो अळग नामे ओळखावती.
कुळदेवी मंगल मात चालराय आजे उतारुं आरती.......2
लाल आँख्युं हाथे शस्त्र तुं चामुंडा कहावती.
देवी कृपाळी जोर भुजाळी तुं रवराय पुजावती.
मनमूरत सोवन गळे माळा दैत्य मुंडन सुहावती.
कुळदेवी मंगळ मात चालराय आजे उतारुं आरती...3
धर रुप विकराळ देवी तुं तो निज सेवगां संकट उबारजे.
कर जोड़ करे अरदास"दास" भवपार माड़ी उतारजे.
आवजे सेवगां साद तणी वार न लाजे महामति.
कुळदेवी मंगळ मात चालराय आजे उतारुं आरती.....4



प्रिंस देवल "दास" भलूरी बीकानेर
सादर जय माताजी
त्रुटि हेतु क्षमा
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Sunday, 8 January 2017

चरण मोहि राखो चालकनेज,

कुल देवी श्री चाळराय के श्री चरणों में टंकण का प्रथम प्रयास कँवर सा के साथ
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

चरण मोहि राखो चालकनेज,
शरण तव छोरु जी हमेश।। टेर।।
विविध वृद ज्यूंही मो धारो,
चरण रो दीज्यो माँ सहारो।
कुपात्र जाण कर काँई,
मात न पूत मन मारयो।
उबारो आप रो जन देख,
चरण मोहि राखो चालकनेज      ।।१।।
मति गति तू ही महामाई,
सकल संसार सकलाई।
विपत में याद तू आई,
बुद्धि दी पहले भरमाई।
दाता आप दो मो देश,
चरण मोहि राखो चालकनेज
।।२।।
ध्यान दो ग्यान दो धाता,
विमल जस की तू उपजाता।
सकल संसार की सरनी,
त्रिविध जग ताप की तरनी।
करम गति रेख को ना देख,
चरण मोहि राखो चालकनेज।।३।।
भणे "देव" ज्ञान भिखारी,
जता सह सिक्षा जगवारी।
महड़ू कुल की महतारी,
चरण थिर आ पड्यो थारी।
जनम के दोस को ना देख,
चरण मोहि राखो चालकनेज।। ४।।

रचित
देवराज सिंह जाड़ावत
ठिकरिया कविराय
बूंदी

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नव दिन नमो नोरतन

नव दिन नमो नोरतन, चाळराय मेहड़ू कुळ महमाया।।टेर।।
मंढ मनरंग थल सूं आई ऐ सगती *मेहड़वा* गांव रे माय।
आगे सरणे आपरे हेते *बाड़ी* सुभस बसाई।
*सरस्यो* *सोडावास* *देवरी* *खेड़ी* *खेडला* माई।
धिन कर धुर *जेथल्या* दरसो, *संचई* सुरराय।
*लिलेडे*लाल ध्वजा फरके, मोद *मंडावरा* मायं।
हरदम *मऊ* हरष कर विराजे, राज *ठीकरीये* गढ़ ठाई।
झाँझा सासण जहाँ तव भासण,शुभष बसों सुरराय।
*मेहड़ू* *खिड़िया* चाकर थारा, राखो चण्डी छतर छाया।
*मेहड़ू मदन* हरष कर अम्बे, चिरजा भेंट चढ़ाई।।
मेहड़ू कुळ महमाय......

रचित
ठा. सा. मदन सिंह जाड़ावत
ठिकरिया कविराय
जिला बूंदी (राज.)

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Thursday, 5 January 2017

मनरंग थल चाळकना मढ़ में माताजी के रास रमण का वर्णन

मनरंग थल चाळकना मढ़ में माताजी के रास रमण का वर्णन।

।।दोहा।।
जळ थळ सिमरे जोगणी,सिमरे नाग सुरेश।
यक्ष किन्नर जती सती,सिमरे ज चाळकनेश।1।
जमी थळवट जोगणी,अडग आसन अशेष।
पुरे श्वास उश्वास री,नमोज चाळकनेश।2।

।।छंद रोमकंद।।
धिन एकम आज भवानिय चौसठ,मात धरा मनरंग मळी।
अति आनंद आज भरयो रतनाकर,नेन अमी वरसात वळी।
सब शोभयमान हुवे सिंह ऊपर,आभ उडड्गण भोम भमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।1।

असमान उगो शिव भूषण शीतल,मंद समीर ज धीर बहे।
धवळा रमणीक जचे धर ऊपर,चंद धरा उतरान चहे।
मनमोहक रात भई नवरात यु,जोगण जाजम जाय जमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित रात उजाळिय रास रमे।2।।

झळके पळके मळके अति आनन,खाळ अमी खळके ढळके।
पळके रखड़ी नग हीर पळोपळ,नीर सूची रळके जळके।
लळके सिर मेमद बोर छत्रों बिच,भाण उदोत ज जोत जमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।3।

कर धार कटार सवार सबे किलकार करे खळ दळळ् खपे।
तलवार ज वार सहार निशाचर,धार जु शोणित आप धपे।
हलकार करे नवलाख हिळोमिळ,नाग सुरंदर तोय नमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।4।

चटणी कर शुम्भ निशुम्भ निशाचर,कुम्भ निकुम्भ ज दैत्य दळे।
महिसासुर मार सहारज मामड़,आप समोवड़ कोण वळे।
अवनी प्रगटी सब भार उतारण,चारण तारण मात तमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।5।

मदिरा भर प्यालिय हो मतवालिय,लाल रूपालिय दृग लसे।
कड़की जद कालिय बीस भुजालिय,होय क्रोधालिय जोर हंसे।
खमके खपरालिय बुढ़िय बालिय,जाजम ढालिय मात जमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजालिय रास रमे।6।

कड़ड़ाट बजे घण पीठज केहर,गाज घटा गड़ड़ाट गती।
धड़के धड़ड़ाट धरा पग धारत,आभ गजे अड़ड़ाट अती।
हड़ड़ाट हँसे अरियो दल हेरत,खाग तणो खड़ड़ाट खमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।7।

झटपट्ट झपटट् चपटट् तु चाळक,दाणव मार दपट्ट दिये।
खटपट् खट्टट खट्टट भृखे दळ,श्रोण सुघटट् प्रघट्ट पिये।
जमदट् उलटट् पुलटट् झटोझट मात हमम् मटट् वट हमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।8।

फरगट्ट नचे थळवट्ट धरा पर,माथ मुगट्ट सुघट्ट जचे।
लटपट्ट घुमटट् ज वटट् पड़े वपु नट्ट जिमी उदभट्ट नचे।
रमझट्ट अमट्ट करे मिल चौसठ,भट्ट करी ब्रह्माण्ड भमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।9।

बज ढोल धमंक धमंक धिधीकट,डाक डमंक रु शंख बजे।
खणके ज खमंक खमंक खरोखर,धींगज धींग मृदंग गजे।
उचरंग उमंग हुवे मनरंगज,दंग सबे नरतंग नमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।10।

“जगमाल″जंजाळ दुआळ मिटे सब,बाळ विहाळ संभाळ लयो।
झट चाल उताळ कृपाळ वळोवळ,वाळ दुकाळ,सुकाळ दयो।
विकराळ विशाळ भुजाळ दया कर,भाळ दशा तुझ बाळ भमे।
सिणगार सजे नवलाख सुशोभित,रात उजाळिय रास रमे।11।

।।कळश छप्पय।।
मात रमे मनरंग,धरा बिच आप धिराणी।
मात रमे मनरंग,वेद शास्तर वखाणी।
मात रमे मनरंग,संग चौसठ सुरराणी।
मात रमे मनरंग,सकल ब्रह्मण्ड समाणी।
सवदसी रात मढ़ सोवणो,सगती मिळे चाळराय।
“जगमाल″किंकर तोय जपे,शरण पड़यो सुरराय।।

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देवी जोगण चाळकनेच जयो

देवी जोगण चाळकनेच जयो

दोहा

चाळराय रै चाळरी, झाली सेवक झंब

वळियो दिन टळिया विघन, आंगण फळियो अंब।

दे झंझेड़ी रोग दुख, पग बेड़ी खळ पेच

तूं बालक तेड़ी तठै, नेड़ी चाळकनेच।

छन्द रोमकंध

सुभ भाळक दीठ संभाळक सेवग, झाळ बंबाळक रोस झडै़

विकराळक सींह चढै विरदाळक खेतरपाळक अग्र खड़ै

चक्ख नक्ख सरूप रचै चिरताळक दाणव गाळक संभू दयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक जोगण चाळकनेच जयो

                      देवी जोगण चाळकनेच जयो।1।

रण ताळक झाळ सत्रां सिर राळक के महीपाळक सेव करै

चमराळक सीस ढुळाळक चैसठ, तेज उजाळक भांण तरै

अकराळक घाट धताळक ओपत,थाट थटाळक आण थयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो।2।

भळळक्क त्रिसूल बणे अंग भूसण, कोर जरी पळळक्क कियै

नचतां खळळक्क पगां बज नेवर, हार नगां हळळक्क हियै

मुळळक्क पहेपक फूह झड़े, मुख तेज रवी भळळक्क तयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                            देवी जोगण चाळकनेच जयो। 3।

चट पट्ट निपट्ट झटोपट चोसठ, नाच अघट्ट अमट्ट नचै

अट पट्ट मुगट्ट धरै सिर ऊपर, रास सुभट्ट प्रगट्ट रचै

झंणणट्ट सुघट्ट वजे पग झांझर, थाट थडां संणणट्ट थयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                            देवी जोगण चाळकनेच जयो। 4।

धम धम बजै घम घंम नचै धर, नेवर पै ठम ठंम नदंा

नम नम्म भवनींय चामुण्ड नाचत, व्है डमरू डमडंम हदां

चम चम्म आभूषण अंग चमंकत, भाण उदेगिर बीच भयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 5।

नमकै घमकै ठमकै पग नूपर, चूड़ भुजां दमकै चमकै

क्रमकै दहूं कुंडळ कांनन का, छत्र छागळीया रंकमे छंमकै

समकन्त सिन्दूर री रेख संवारत, भाळमकै अभकै भरियो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 6।

चलती ललकार हिलोमिल चैसठ, हाक भैरूं हलकार हसै

नचती भळकार वळो वळ नाचत, लाल चुड़ी भळकार लसै

तिलकां भळकार करै पलकां तिक, प्रेत मुखां बलकार पयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 7।

चंड मुंड घुमंड बिहंडक चामण्ड, नव खंड अरू ब्रहमंड नमै

प्रचंड हुडंड भूडंड प्रखंडज, रूंड दुरंड अखंड रमै

झुण्ड जोगण थुण्ड उभंड झटोझट, खण्ड नवंृ चण्ड खेह खयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 8।

खळ थोगण स्रोण अरोगण खप्पर, छेड़त जोगण जोस छिले

मद भोगण मांस आरोगण मैमंत, घाव त्रमोगण दैत घिले

अंग रोगण मेट ढके पर ओगण, क्रीत अमोगण रीत कयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 9।

वजि डाक त्रंबाक धमांक वळोवळ, हाक चंडी नव लाख हमैं

पडि़ धाक नरां चाक प्रथी, नर नाग सुरां असुरांक नमैं

मद छाक अैराक पीयाक हमेसज, ले बकराक चढाक लियो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 10।

झणणाट बजै रमतां पग झांझर, व्योम डंका बणणाट बजै

खपरां खणणाट हुवै रत खावण, छोळ रत्रां छणणाट छजै

नचतां झणणाट पगां वज नेवर, छत्र छटा छणणाट छयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 11।

ब्रहमांणीय रांणीय बेद बखाणींय, जांणीय मांणीय चार जुगां

असुरांणीय घांणीय मार उडाणींय, खांणीय बांणीय झाल खगां

सगतांणीय होय ब्रह्मणीय साथे, नाच नचांणीय घाट नयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 12।

चाळराय सिहाय बधाय सुचारण, गाय बजाय रीझाय गुणां

सुरराय नमों मंहमाय सुरांपत, खाय खळां खपवाय खणां

गढ़ गाम दिराय चढ़ाय गजां, पर आद भवांनीय सहाय अयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 13।

बुधवांन समांन ब्रवांन बळोबळ, थांन सुथांन अमांन थप्यो

असुरांन खपांन भुजांन अजांन, जुंजान जुगांन जिहांन जप्यो

महादान व्रदांन ब्रवो सनमानय, चैन सदा अनुमांन चयो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 14।

परजेस रमेस महेस प्रमेसज, सेस खगेस गुणेस सजै

अरधेस रिखेस रटै घट ओघट, भेस दधेस हमेस भजै

नर देस नरेस नमामि करै, नित केसव ज्यंू प्रणमेस कियो

प्रतपाळक बाळक रोग प्रजाळक, जोगण चाळकनेच जयो

                         देवी जोगण चाळकनेच जयो। 15।

छप्पय

रांमत चाळकनेच, जका गति लखी न जावै

इन्द्र करत आदेस, परम गति लखी न पावै

सेस निंवावत सीस, धिनो ब्रद तूझ सगती

आई आद अनाद, पुरख पुराण प्रकत्ती

सुर असुर पार पावै नहीं, आप बड़ा छौ ईसरी

चाळक देवी चरित चवै, जयो मात जोगेसरी।

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Wednesday, 4 January 2017

चलकनेची त्रिभंगी छंद

चलकनेची त्रिभंगी छंद

🙏🙏चाल़कनेची चामुडा 🙏🙏
                दोहा
गंग गया काशी गया,  पावन किया  निपाइ।
जग अभया विजया जया, अमया खमया आइ।

विमल़ा कमल़ा वीजल़ा चख   भूंभल़ा सुचंग।
महिल़ा अकल़ा मंगल़ा,सकल़ कल़ा शिवसंग।

अवरी अमरी अपशरी,शीकोतरी सकत्त।
आशापुरी अगोचरी, माहेशरी  महत्त।

जगहरणी करणी जगत, सुर सामण सुभेद।
अशरण  शरणी अपरणी, वै वरणी  चत्रवेद।
         छंद त्रिभंगी
वेदाँ  वचाणी  पढे पुराणी क्रोड़  विनाणी  कतियाणी।
के काम कामाणी   अकह कहाणी, जय सुरराणी जगजाणी।
भाखै ब्रह्माणी तूं मन भाणी, अविरल  वाणी ऊदंडा  ।
रवराय रवेची  मुहमाडेची , चाल़कनेची   चामुंडा।१।

आशापुरी आई देव दुगाई , महण मंथाई मंहमाई।
सतसील सदाई जुथ जेताई, गाढ बढाई गरवाई।
दैतां दुखदाई सुराँ सहाई ,खिता उपाई नवखंडा।
रवराय रवेची मुहमाडेची, चाल़कनेची  चामुंडा।२।

सेवे ब्रमत्ती जत्ती सत्ती आद सगत्ती अवगत्ती।
पावन प्रकत्ती वेद वकत्ती तूं सुरसत्ती त्रिसगत्ती।
महमाय मुरत्ती उत्तम अत्ती सत्ती पत्ती पतसुंडा।
रवराय रवेची मुहमाडेची चालकनेची चामुंडा।३।

सुन्दर हंसलाल़ी सदा सुखाल़ी रम्मतियाल़ी रतियाली।
कोयला गिरवाल़ी धरण कमाल़ी बूढी बाल़ी बिरदाल़ी।
त्रिपुराचर ताल़ी मन मछराल़ी पाप प्रजाल़ी परचंडा।
रवराय रवेची मुहमाडेची चालकनेची चामुंडा।४।

केहरि असवारी अकन कुंवारी मास अहारी मेवारी।
धन पुहच तुहारी अज अवतारी तू भवनारी भवतारी।
पीयत रत पाडा मारण जाडा अहर अराडा अरिचंडा।
रवराय रवेची मुहमाडेची चालकनेची चामुंडा।५।

माता मातंगी उत्तम अंगी बाण सुचंगी वेदंगी।
त्रिचख अरधंगी लहर तरंगी निज भेदंगी नादंगी।
निहकल़ निकलंगी रिध सिध रंगी अजा उमंगी ऊदंडा।
रवराय रवेची मुहमाडेची चाल़कनेची चामुंडा।६।

वीराँ रा टोल़ां साथ सबोल़ां,झूल झकोल़ां रमझोल़ा।
धूपाँ ढगसोल़ां नित्त उधोल़ां होय किल़ोल़ां हींगोल़ा।
जोगण खेखट्टा रूप विकट्टा  खेल झपट्टा  खल़खंडा।
रवराय  रवेची मुहमाडेची चाल़कनेची  चामुंडा।७।

उतरे आकासं विवरे वासं वलै़ विलासं कवल़ासं।
वडवडा तमासं हास हुलासं  जोत प्रकासं ऊजासं।
जग व्यापक जोई कल़े न कोई पारन होई पाखंडा।
रवराय  रवेची मुहमाडेची चाल़कनेची  चामुंडा।८।
                छप्पय
चालराय चामुंड  माड मांडण महमाया।
चरताली चंडिका कालिका कायम  काया ।
नवनेता भवनारि  नवे  दुर्गा नव  निद्धी ।
इम हमीर उच्चरै शरम  राखै हरसिद्धी।
सावत्री गौरी लखमी शकति, गुण रजतमो सतोगुणी।
बीसहथी धन्यधारी वडम,  जय जालंपा जोगणी।।
(कवि हमीर जी रतनू कृत)

भूदेव आढा
करणी कुटीर जयपुर

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Monday, 19 December 2016

माँ चालकनेश रा दोहा

.              माँ चालकनेश रा दोहा 


ऊक्ती देवण आवड़ा, मोटि सगत महमाय  ।
उर मै विद्यया आपजे , चालकने री राय ।।1।।
धज बंधण धाम धरा पर, नाम पुजै नवखण्ड ।
आई  थारै  आसरे , भूमी अर भृह्मण्ड ।।2।।
वाघ वाहणी विसहथ्थी , हाथ त्रिशूल हजार ।
पूजै आखी परथमी , अपणी तुह ओधार ।।3।।
धर अम्बर मोटो धणी ,  मोटो भाण महान ।
उण सौ मोटी आवड़ा , देवी गढ़ देशाण ।।4।।
मामड़ रै घर मावड़ी, आय लियौ अवतार ।
मनरंग थल मोटो कियौ , भुमी उतारण भार ।।5।।
सेवग झाली सेवना , मोटि जाळ मनरंग ।
काटे कष्ट विघन हटे , आंगण हो उचरंग ।।6।।
ऊर भर विध्या आवड़ा , डावड़ थारो दास ।
अवल रखे नित अम्बिका , पहलो कीजै पास ।।7।।
दुहा छन्द कवता दिजै , किजै सफल सब काम ।
सेण तणी कर सायता , अवल रखे मम नाम ।।8।।
चालक विनती सांभले , बाळक री बाणीह ।
आप सिवा कुण आपणो , चालक सुरराणीह ।।9।।
जाणी आखे जगत में , प्रथम तुह पुजाणीह ।
हिंगळा ऊपर हेत थी , मैहर धणियाणीह।।10।।
क्रमशः
 हिंगलाज पुत्र तेजदान ओगाळा
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Monday, 24 October 2016

चाल़कनेची का प्रहास शाणोर गीत – मीठा मीर डभाल

सरव परथम समरण मात तो शारदा,
रदे बीच भरोसो अडग राखूं !!
जीभ पर बिराजो आप मां जोगणी,
भवां चाळराय रा गुण भाखूं !!1!!
आप अम्ह बुद्धि बगसावजो आवड़ा,
करनल्ला मात तो महर कीजो !!
आपरो नाम लिय कर रहयो आपदा,
दयाळी उकत सध आप दीजो !!2!!
अधक महिमा इण ईळा म्ह आपरी,
सगती सरव जगत में आप साजो !!
तनां कहूं चाळका बाळको तिहारो,
थान सूं आय मां सहाय थाजो !!3!!
वखत पहलां तणी वात आ विदंगां,
ईळा पर आवियो समय ऐहड़ो !!
भाट अरज दाखवी आय भूपाळ ने,
नृप बतावो मोय कवि नेहड़ो !!4!!
कवि जो आय होड़ साथ म्हारे करै,
मुझ तणो हटावै गरव मोटो !!
प्रथीपत नहींतर हार मांनो परी,
खीतिपत राख नह मांण खोटो !!5!!
रौष नह कीजिये उतावळ रावजी,
भाट कव रीत रा वयण भाखो !!
विचारो दिलवसै सांभळो वातड़ी,
राव कां साव नह भाव राखो !!6!!
गुणी कव बोहो धरा गुजरात में,
शुकवीजन किरती करे सारी !!
जिकांह रे साहेजे सदाय जोगणी,
धर्यो खड़ग डाढाळी छत्रधारी !!7!!
कासद ने मेलयो कवि वरसड़ा कनें,
मावलजी हेत कर अरज मांनो !!
भाट होक्काट कर आवियो भाळवा,
कवि नह रहयो कां लियो कांनो !!8!!
आवियो वरसड़ो आख मोंय अधपति ,
ओ किम ऱाव आय हि हुओ कोपै !!
भजाळी तणो रख भरोसो भूपति,
लोवड़ियाळ लाज न मात लोपै !!9!!
बोहो कर गर्व जद भाट मुख बोलियो ,
चारण कवि होस तो आव सांमो !!
मंत्रां सूं बोलावै बाळ छः मास रो ,
करे बतावै आज ऐह कांमो !!10!!
मावल जद हेत कर सम्मरी मावड़ा,
आवड़ा इण वखत भीर आवो !!
लाज माहरी रख धारणी लोवड़ी,
दोह्यली घड़ी रो सुणो दावो !!11!!
भजाळी अरज ऐम सांभळै भवानी,
स्वपने में कहयो वैण साचो !!
बोलै बाळक आ तो जरियक बातड़ी,
कथूं हूं बोलावसूं कुंभ काचो !!12!!
रवि उगन्तां थकां गया सहु रावळै,
मावलजी करी जिका हौड मोटी !!
जीव व्हे जिका तो बोलन्ता जगत में,
करावूं गणणाट हूं कुंभ कोटी !!13!!
संभा बीच पाट जद मेलयो सेवकां,
जोवै सह मेदनी मिळै जाजी !!
भाट ओ थाट तो देखतां भड़कयो,
बोलावसौ कुंभ किम आज बाजी ?14!!
भाखै ईम भाट आ थाट ने भाळतां,
थाय कुंण वरसड़ा सहाय थारी !!
अजै तो कहूं हूं संभा रे आगळै,
स्वीकारो वात थई भूल सारी !!15!!
मन संशय करण लागेयो महपति ,
जो जीतीयो भट्ट तो पत जासी !!
आज उबारो बीस हत्थी आवड़ा,
थीं बीन कुंण मों सहाय थासी !!16!!
करो नह सौच ऐम मावल कहै ,
मात रो भरोसो हैं अडग मुन्नें !!
भमता कुंभ ने बोलन्तो भड़ाके,
तो रावजी मिळै नह राह तुन्नें !!17!!
वन्दन कर मात नें मावलजी विनवें,
जोगणी देखे किम लाज जातां !!
वार नह करी तो सांभळो वाढाळी,
प्राण नह रहसी आज पातां !!18!!
घुररर कर पाट जद लागयो घुमवा,
गणणण व्योम गणणाट गाजै !!
भणणाट नाद ऐम करायो भवानी,
वाजन्त्र छतीसां रा सुर वाजै !!19!!
हठीलो ध्रुजयो भाट कर हाकला,
मावलजी थई बोहो भूल म्हारी !!
पांव पकड़ने कूकीयो पौकदै ,
धणियाणीह चाळका बिरद धारी !!20!!
पलक में भाट ने पगां म्ह पाड़यो,
सवायोह बिरद जस द्वीप सातां !!
आंण वरतांणी चहुं लौक में आपरी,
वरसड़ा तणी रही अखियात वातां !!21!!
बिरद वधारण चारणा वरण रो ,
भाट रो गरव तें सेंग भांगो !!
मावल रे आगळै आय वो मावड़ी,
लाज लोपै झट पाय लागो !!22!!
चंडी ल्ये जनम उजळ वरण चारणां,
उबारणां काज अवतार आवै !!
माड़धर जनमी मांमड घर मावड़ी,
नैजाळी तिहारो थाग नावै !!23!!
लोवड़ियाळी हुई नवलक्ख चारणां,
थाय चहुं दिशा जयकार थारो !!
गावै गुण मीठियो मीर मां रावळा,
तरणी कर महर भवपार तारो !!24!!
~~मीठा मीर डभाल

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