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Friday, 25 May 2018

डोलरदान भगुभाई रोहड़िया शताब्दी महोत्सवे

_*ताजेतरमा गुजरात राज्य संगीतनाट्य अकादमी तथा यूनिवर्सल मेहड़ु अल्लायशना प्रयासथी त्रण मध्यकालीन चारण कवियो लागीदासजी मेहड़ु, व्रजमालजी मेहड़ु तथा कानदासजी मेहड़ु ना द्वि शताब्दी- त्री शताब्दी महोत्सव उजवणी अनुक्रमे हळवद धांग्धरा ठाकोर साहेब, जामनगर ठाकोर साहेब, राजकोट ठाकोर साहेब तथा गायकवाड़ सरकार तथा साणंद ठाकोर साहेबनी उपस्थितिमा मेहड़ु कुळनी कावी प्रतिभाओं तथा दैवत्वने बे शब्दोथी नवाजवानु सदभाग्य प्राप्त थयु।*_

*मेहड़ु सुजस- पच्चीसी-दुहा*

રંગ કચારી રાજરી,અવઙભઙ નર અટ્ટ,
જાઙો ચારણ જગ્ગવટ્ટ,વઙ વધારણ વટ્ટ ..1
જ્યાં નામે વઙ જગરા,સામંતા રુ સુભટ્ટ,
નામે નહ નરસિંહરા, જાઙો ચારણ જટ્ટ.  ...2
ગોરા હાકમ ગરજતાં,રાખણ નિર્ગણ રટ્ટ,
દરિયાપીર દાખે દયા,કહાનદાસ વઙ કઠ્ઠ, ....3
નાંગળ લોહ નોંધિયા ,  કોટઙિયા મહ કઢ્ઢ,
વિનવતાહી વાંભયા,  દરયાપીર તત દ્રઢ્ઢ ,....4
ભિઙ પઙે માં ભારથી , અઙાભિઙ કવિ અઠ્ઠ,
કાનદાસ કિરત કહી, રીજ દરિયાપીર. રટ્ટ......5
રચી કવિતા રંગથી,  મહિમા મહિ મહઠ્ઠ,
ગોદઙ મહેઙુ ગર્વસુ,    દુહા તિનસો સઠ્ઠ, ...,....6
લાગીદાસ નર લાધિયો,હરિભાવ કર હથ્થ,
સતસ્મરણ કર સરજ્યો,ગહન રામરસ ગ્રંથ્થ....7
પરાક્રમ સૂર પુત્રના  , રચ્યા કાવ્ય રમમાણ,
અોખાહરણ કહ્યો અતિ,લાગીદાસ રસ લાણ,....8
અેકાદસી વ્રત ઊક્તિ  ,રાજ સગણ જસ રંગ,
લાંગીદાસ અેતા લખ્યા,અતિ ગહન  ઊમંગ......9
સંગ્રામે કર સોંપિયો , ફરણ હય  ફુલમાળ,
બીર્દ  લાંગીદાસ બરણ,જાઙેજા જસમાળ,.....10
જસવંત મહેઙુ  જબર ,વ્રત અજાચી વિર,
વાઘેર જામે વેઙિયા,  સોંપ્યો નિજ શરીર ,.......11
રણભેરી બાજી રહ્યા, ઘાવ નગારે ઘોર,
જસો મહેઙુ તવ જપ્યો,તહાં પવાઙો તોર,........12
પુતર માંઙણ રો પ્રબળ,  ગહન કવિ ગંભિર,
રચી અભેસિંહ રજરી, હસ્તિ છઙી  કટિહિર,, ......13
જાણી વ્રૃતિ રાજ જસ,પાઠ પઠણ હર પંથ,
લાગીદાસે તત લખ્યો,હરિ સ્મરણ હર હથ્થ ........14
છંદ નિશાણી છપયો,બાબી જેઠવા બથ્થ,
લાગીદાસ જુધે લખ્યો, ગણ બાબીરો ગ્રથ્થ.........15
રામવાણી રસણાં રચી, રામદાન કવ રાણ,
છંદા દુહા થી છજ્યા, રસ કવિત રસલ્હાણ,.......16
રતનાકર જેસો રચ્યો  ,ભક્તવત્સલ ગ્રંથ ભાણ,
મુક્ત કવિ યું મહકતો  ,  પારસ સિધ્ધ પ્રમાણ  .....17
સત્ય વાત નિતિ સભર,  કરે ભક્તિ કલ્યાણ,
મુક્ત કહ્યો નિજ મુખથી,દેવ કવિ દહેવાણ ........18
ઙુગરસિંહ વટ ઙિણસી, થળા જાગિરે થઙ્ઙ,
છતરશાલ ઝાલા છવ્યો,દેગામ થાપ્યો દ્રઢ્ઢ ,........19
મહેઙુ કવિજન મોજથી, રટ્યા ગ્રંથ નવ રંગ,
જગદંબા તું જેતબાઈ  , ગઢવી  આંગણ ગંગ.......20
સામરખા ગામે સબળ ,કાનદાસ જસ  કુળ,
મુરાદ સમ ચેલો મળ્યો, મહેઙુ  ચારણ  મુળ........21
રુપ ધરી રણચંઙિકા ,  બેઠી ગાઙે બાઈ ,
ચોવીસી દઈ ચંઙિકા , જેતી લાખા જાઈ,............22
આ ધરતિની ઉપરે  , કૈક રતન કવરાજ ,
કાનદાસ આ કળયુગે ,લેખી ભક્તિ લાજ,..,.......23
રાજ દરબારે રખિયુ, રુઙી ચારણ રીત,
લાંગીદાસ વ્રજમાલ લે,કહાન મહેઙુ ક્રિત..........24
સુજસ મહેઙુ સાંભર્યો,રાજ સમારંભ રંગ,
કવિ "દાન " કિર્તિ કહી,સત્ય કવિતા સંગ,........25

*डोलरदान भगुभाई रोहड़िया*
*धुनागाम, ता. पडधरी, जिला- राजकोट.*

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Friday, 8 September 2017

उपरोक्त दूहो फेसबुक माथे पोस्ट कियां बाद सुहागी रा शक्तिदानजी मेहड़ू अर मीठा मीर डभाल रे बीच में हुई वार्तालाप

भालाळे पाबू भलां , कमध निभायो कौल ।
ओ मिनखो अनमोल , शूर कही आ शामळा ।।
मीठा मीर डभाल
उपरोक्त दूहो फेसबुक माथे पोस्ट कियां बाद सुहागी रा शक्तिदानजी मेहड़ू अर मीठा मीर डभाल रे बीच में हुई वार्तालाप

मीठा मीठै मीर, गुण पाबू रा गावेया!
भालाळो ले भीर, अबखी मैं आवै अवश?

कमधज पाबू जो कही ,  सो पाळी सिरदार ।
आप होय असवार , सरगां पूग्यो शामळा ।।
मीठा मीर डभाल

वेदू रा पाळै वचन, (ऐ) रजपूतां री रीत!
देवल सगती ने दिया, पाबू कौल स प्रीत?

अटल नेम राखण इसा , हुवे न भूप हमेश ।
जनमे पाबू जेहड़ा , नामी कोय नरेश ।।
मीठा मीर डभाल

कमधज वेदू कारणे , कियो शीश कुरबान ।
भूल्यो कौल न भूपती , जिका सत्य कर जान ।।
मीठा मीर डभाल

कवियों रे वचनां कजू ,साको किय समराथ!
पाबू रचायो प्रथी पै, भालै सू भाराथ?

देवल जो नह देवती , पाबू हाथ पमंग ।
अमर न होत कमध उत्त , सेंधव रे कज शामळा ।।
मीठा मीर

झगड़ां मैं के झूझया, जकां नही जग जांण!
पाल लड्यो कज पांथूआं, प्रसिद्ध दुनि परमांण?

पी दारु परवारयां , करतों रहे कंकास ।।
उणरो जस इतिहास , संग्रहे नांहि शामळा ।।
मीठा मीर डभाल

ढळे पड़ै के ढोलियै ,सड़तां मरै शरीर!
वेदू कज इक वीर, पाबू नै पूजै प्रथी?

दमा रोग हुय देह में , मांदों होय मरन्त ।
कोय न याद करंत  ,शूर दान बिन शामळा ।।
मीठा मीर डभाल

वोट तणो आयो वखत, ताकत रो नह तोल!
दमा खांसी दारूडीया, मळै न मांघै मोल?

वोटां राज विगाडयो , लोक हुआ लाचार ।
मेहनत बिना धन मिळे ,ऐह सब रहे उच्चार ।।
मीठा मीर डभाल

अबळा सो सबळा अबै, नबळा हुआ नरां!
पड़्या रहै पिछवाड़ मैं, कितरो सोच करां?

आगे नह अबळा हती , सबळा हती सदाय ।
भवानी असुर  भरखती  , आप सगत झट आय ।।
मीठा मीर डभाल

सबळा होवण सगत रो, कदियक पड़तो कांम!
वसुन्धरा रै वखत मैं, हालत करी हरांम?

माया खातिर मुलक में , नरां छोड़यो नेम ।
हाकम जद औरत हुवे , कुशळ आवसी केम ?
मीठा मीर डभाल

जीन्स पैन्ट पैरै जबर, ऊघाड़ी अरधंग?
वंश विगाड़ण वनीयता, रंग हो रांणी रंग?

मरजादा रख मेहळा , नरां न ताकत नार ।
हीण नजर दुनिया हुवे,  (तो) वधे जद व्यभिचार ।
मीठा मीर.डभाल

भलकारा भूरी भणै, जाटां तणी जमात!
रजपूतौ रै राज में, कैम रहै कुशळात?

राज न हाथों राजनां , अब जूठी सब ऐह ।
तेगां ठौड़ ज ताळियां ,
तुरत बजावे तेह ।।
मीठा मीर डभाल

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Friday, 24 February 2017

मेहड़ू

.                          मेहड़ू जाती
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.                      *मेहड़ू(तैनाथी मेहड़ू शाखा चाली)*
                               ⬇
                            *राणो*
                               ⬇
                           *फरशु*
                               ⬇
                            *राम*
                               ⬇
                          *भुवन*
                               ⬇
                          *काशप*
                               ⬇
                     *बळराम (बाणो)*
                               ⬇
                           *रतन*
                               ⬇
''"|'''''''''''''''''''''''|''''''''''''''''''''''''''|''  
 *कुल*          *बोवीर*            *लुणपाल*


*नोध:-*  ढोला मारुना सौ प्रथम चारणी शैलीमां डिंगल दुहा लखनार लुणपाल मेहड़ू  (देगाम) ने आ कृति माटे जूनागढ़ राज्य तरफथी  ५० करोड़नो क्रोड पसाव थयो हतो।

देगाममां बीजा लुंणपाल मेहडुने पण थळा राज्य धांगध्रा तरफथी जागीर मळी हती अने साथो साथ राजा भीमसिंहे पोतानु देहदान-अंगदान करेल हतुं.
लुणपाळ मेहड़ू (पहेला) ने बार बिरदो मल्या हता आ मेहड़ू कुळमां थरपारकरमां धनराज मेहड़ू प्रतापी अने उदार पुरुष हता तेमने बिरदावतो आ दोहो जुओ.

*विशोतर अंजस करे, अंजसे मेहड़ू आज।*
*काळीझर अंजस करे, राज थकी धनराज।।*


आ मेहड़ू शाखने गौरव अपावे तेवा उत्तरोत्तर कर्मी पुरुष आ शाखामा थया अने हाले पण स्यामलदान शंकरदानजी मेहड़ू सुहागी राजस्थान जेवा सुप्रसिद्ध कवि रत्नों आ शाखामां मोजुद छे.
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Friday, 6 January 2017

महेडुओ के कुल धर्म व गावों की नाम सहित चिरजा

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          *कुलदेवी श्री चालकनेच्याय नमः*

*महेडुओ के कुल धर्म व गावों की नाम सहित चिरजा*

मांनी महेडु कुल महमाया, चालक रख बालक पर छत्र छाया।
महेडु गोत्र से मेहड़वो थरप्यो *बाड़ी* आप बसाया।
जाडो भोगी जाजपुर जननी, *सरस्यो* थांनक थाया।।१
*जेथलगढ़* ज्युई संचेई रावजी पद रखवाया।
ठीकरिये कविराजा ठावा, *मऊ* *लीलेड़े* थांरी माया।।२
*खेरी* *देवरी* और *खेड़ला,* *भांणपूरा* भल पाया।
*सोडावास* *बजाकड़ा* *स्याहली* जाडा *मंडावरे* जचाया।।३
*बीड़को बास बास कुड़की* को *राजोले* (थे) रिझाया।
*झुंठा, जोधावास बोरुंदा*  लूणकरणोत लखाया।।४
आदू वंस अक्षय कुल शंकर, गौतम रिषी गिणाया।
महेडु साख मेदनी मानी, परवर त्रय फुरमाया।।५

उपरोक्त माहिती- श्री करणी कला प्रकाश ग्रन्थ से प्राप्त हुई।
रचियता:-  स्व. श्री शंकरदानजी महेडु जाडावत

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Monday, 7 November 2016

महेडु

बहुत से भाइयों को, विशेष कर नवयुवक मेहड़ू भाइयों को यह क्रमवार जानकारी हो या न हो,, लेकिन तथ्यों की गहराई और इतिहास एवं इस कुल के बही भाटों के साक्ष्य पूर्वक अध्ययनों से यह प्रमाणिक और प्रमाणित होता है कि मेड़वा जो कि मेहड़ू जी केशरिया ने बसाया था, यहाँ से एक नई शाखा मेहड़ू अस्तित्व में आई, कालान्तर में समयानुसार लोग पलायन करते गये मेड़वा से कुछ लोग बीकानेर चुरू सीकर तक चले गए, कुछ लोग पारकर जो कि पशु पालन और पानी के लिए सुरक्षित स्थान कहा जाता था, उस तरफ चले गए, पारकर से समय समय पर लोग काठियावाड़ और सौरास्ठ की तरफ गये, मेहड़ू जाति को प्रसिद्धि और पद काठियावाड़ में सबसे ज्यादा मिले, लूनपाल जी, गोदड जी, लांगी दास जी, और वजमाल जी ने बहुत ख्याति पाई, महाराणा उदय सिंह की एक शादी ध्रांगधरा के झाला राजपूतों में हुई थी, इस क्रम में हमारे पूर्वजों का राजा महाराजाओं के साथ मेवाड़ में आना जाना रहा, यहाँ मेवाड़ में और ईडर में भी मेहड़ू का निवास स्थान हो गया,, आगे चल कर महाकर्ण जी मेहड़ू बाड़ी से सरस्या और महाकवि महा दान जी को मारवाड़ में भी जागीरी प्राप्त हुई, इस प्रकार हमारी जनसँख्या का अधिकांश भाग पारकर और काठियावाड़ में पाया जाता है, राजस्थान में खारी को छोड़ कर बाकि सब छोटे छोटे गाँव है ।पारकर में मेहड़ू की एक समय सबसे ज्यादा आबादी थी इसमें गढ़ समोवड़ गूंगड़ी, उंडेर राठी और डीनसी, मेहड़ू शाखा के बड़े बड़े गाँव थे, पर धीरे धीरे लोग काठियावाड़ चले गए,, उसका मुख्य कारण पारकर के सोढा राजपूतो और काठियावाड़ के राजपूतों के बीच अधिकांश रिस्तेदारी का होना।सबसे पहले डिनशी से कवि श्री डूंगरसी मेहड़ू जी का परिवार गया था, उनको देगाम की जागीरी मिली थी, फिर क्रम बढ़ता ही गया, इस प्रकार हमें मालूम होना चाहिए कि सौरास्ठ, काठियावाड़ ईडर मारवाड़ में ही मेहड़ू शाखा का निवास स्थान है,, 1971 और  विभाजन के समय पारकर से पूरे मेहड़ू पलायन कर गए है, किसी समय में पारकर mehduo की शक्ति और सत्ता का केंद्र रहा आज मेहड़ू विहीन है, आज इतना ही, फिर इतिहास पर बातें करते रहेंगे,, जय माँ चालकनेची जी
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Sunday, 23 October 2016

चारण जाती में महेडु साखा

 .                   ​चारण जाती में महेडु शाखा​


चारण जाती की विशोत्रय मुख्य तेरह शाखा में महेडु शाखा स्वयं की विद्याप्रिति के कारण यश और आदर लिया है।

महेडु साखा की पेटा साखा 13 है. और कुलश्रषि के मूल पुरुष मक्रवाहन है, और महेडु साखा की कुलदेवी जगतम्बा चामुंडा और चालकनेची है.

महेडु साखाओ के मेंद वरसडा रचित सपाखरा गीत में भी इन शाखाओं के प्रमाण मिलते है

                         ||  गीत : सपाखरु  ||


​मेहडु साखरा मोखु केशरिया मैयारिया,​

​जीवा धरा बान्दियाने सोहल्ला ने जोट,​

​रेणंग चाँचगडा ने मोहल   सदाय राख,​

​सब साख मेहडुरी,खरी है सचोट,​


. महेडु,  2. महेरिया, 3. केसरीया, 4. साखरा, 5. रेणग, 6. मोखु,  7. जीवा, 8. धरा, 9. बादीया 10. चाचगड़ा,  11. मोहल, 12. सोहला 13. जोट.


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