. आई जेतबाई माँ
वाळोवड़ प्रगटी वेहद, वंश मेहड़ू वध जाण।
जैत बाई जगदम्ब रा, वेदों करे वखाण।।
कलयुग में परचा के तां, आप्या देवी अपार।
लाखा सदु शक्ति सबळ,इरण वर्ण आधार।।
जैत बाई जगदम्ब रा, वेदों करे वखाण।।
कलयुग में परचा के तां, आप्या देवी अपार।
लाखा सदु शक्ति सबळ,इरण वर्ण आधार।।
छंद नाराच।
सर्व संताप कष्ट काप, सुख आपणी सदा।
अधिक माप, आई अमाप, सैन ताप ही कदा।
अरि उथाप जेही जाप, यो प्रताप ही अलं।
जरूर हाजरा हजुर, जगदम्बा जैतलँ,,1
महीप मान रो गुमान, हार सों उतारणि।
नशाय चारणाय वंश, दुःख को निवारिणी।
माहाय मोहमाय सेवगाय,एक तुं बळं
जरूर हाजरा,,,,,, ,,, 2
सतं शातः ही विख्यात, रूप मात धारीयं।
अपार आपति विडार, ए समे ऊगारियं।
सदैव रूप ही अनूप, तुं पहिं पगे लळं।
जरूर हाजरा हजूर,,,,3
बणी कराळ नेत्र ज्वाळ, काळ रूप तुं बणी।
क्रोधाळ तुं दयाल तुं, विशाळ देवी धणी।
सम्भाळ भाळ पुत्र पाळ,रक्षती जळं थ ळं।
जरूर हाजरा हजुर 4
महीय सागरं धरं,अधिक तेज मंदरं।
सूर नर असूर योंही, सेव कृत सुंदरं।
विडार दुःख वेदवा, पोकारता तेहि पळं।
जरूर हाजरा हजुर 5
लाखा सतन मेर मन, अन्न धन्न आपणी।
प्रसन्न वंश चारणा, विघन ही विडारणी।
कवि ही ठारणं ""दीयो, अधिक रीत उज्जवलं।
जरूर हाजरा हजुर जुगदम्ब जेतलं।।
छप्पय
जैतल तुं जगदम्ब, अम्ब जग थम्ब अळाको
जैतल तुं जगदम्ब, आध्य भेरु अपणा को
जैतल तुं जगदम्ब, वेदवां विघन विहंडन,
जैतल तुं जगदम्ब, खळा शात्रव नित खंडन,
वाळोवडेय देवी वेहद, अडरकव्या अवलंब है
कव्य हाथ जोड़,, ठारण कहे, जैतल तू जगदम्ब है।
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रचियता कवि श्री ठारण भाई मधु दान जी मेहड़ू पाटणा राज कवि
गुजराती में श्री महेश दान जी विजयकरण जी मेहड़ू बोटाद
हिंदी में संकलन एस डी सिंह मेहड़ू
पूगल बीकानेर
त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी।
पूगल बीकानेर
त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी।