Tuesday, 8 August 2017

मन हेत धरंगी, हरस उमंगी, प्रेम तुरंगी, परसंगी।

मन हेत धरंगी, हरस उमंगी, प्रेम तुरंगी,
परसंगी।
सुग्रीव सथंगी, प्रेम पथंगी, शाम शोरंगी,
करसंगी।
दसकंध दुरंगी, झुंबै झंगी, भड राखस जड थड
भंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥1॥

अवधेश उदासी, सीत हरासी, शोक धरासी,
सन्यासी।
अणबखत अक्रासी, बोल बंधासी, लंक विळासी,
सवळासी।
अंजनी रुद्राशी, कमर कसंसी, साहर त्रासी,
तौरंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥2॥

करजोड कठाणं, पाव प्रमाणं, दधि प्रमाणं,
भरडाणं।
भचकै रथ भाणं, धरा ध्रुजाणं, शेष समाणं साताणं।
गढलंक ग्रहाणं, एक उडाणं, पोच जवाणं,
प्रेतंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥3॥

हलकार हतूरं, फौज फतूरं, सायर पूरं संपूरं।
कर रुप करुरं,वध वकरुरं, त्रहकै घोरं, रणतूरं।
जोधा सह जुरं, जुध्ध जलुरं, आगैवानं, ओपंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥4॥

आसो अलबेली, बाग बणेली, घटा घणेली, गहरेली।
चौकोर भरेली, फूल चमेली, लता सुगंधी,
लहरेली।
अंजनि कर एली, सबै सहेली, हेम हवेली,
होमंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥5॥

नल नील तेडाया, गरव न माया सबै बुलाया, सब
आया।
पाषाण मंगाया, पास पठाया, सब बंदर लारे लाया।
पर मारग पाया, राम रिझाया, हनुए धाया,
हेतंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥6॥

लखणेश लडातं, सैन धडातं, मुरछा घातं, मधरातं।
साजा घडी सातं, वैद वदातं, प्राण छंडातं,
परभातं।
जोधा सम जातं, जोर न मातं, ले हाथं बीडो लंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥7॥

हनुमंत हुंकारं, अनड अपारं, भुजबळ डारं,
भभकारं।
कर रुप कराळं, विध विकराळं, द्रोण उठारं,
निरधारं।
अमरं लीलारं, भार अढारं, लखण उगारं, दधि
लंघी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥8॥

सिंदूर सखंडं, भळळ भखंडं, तेल प्रचंडं, अतडंडं।
किय हार हसंडं, अनड अखंडं, भारथ डंडं, भुडंडं।
चारण कुळ चंडं, वैरि विहंडं , प्रणवै कानड
कवि पंगी।
रामं अनुरंगी, सीत सुधंगी, बिरद उमंगी,
बजरंगी॥9 ।।

*~~कानदासजी मेहडु~~*

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Sunday, 6 August 2017

करि समरणां धांनकरि । करणा करणज कोअे

करि समरणां धांनकरि । करणा करणज कोअे।
हेकणवार मरण होअे । फरि अवतरणा नोअे ।।

कोई तो ए दया करवाळा नु ध्यान करो. अेथी  अेक ज वार मुत्यु थशे, ते पंछी जन्मवानुं नहीं होय

परम न गावे पेृमसे । जे जे अधरम जंत ।
भरमी भुला भोगवी । अकरम करम अंनत

जे जे अधर्मी जीवोअे स्नेहपुवॅक परमेश्वर ने गाया नथी भृम थी भुलेला तेओ पोताना अपार पापकमोॅ ने भोगवशे.

राम तजे अन देवरी । कीजी सेव न कोअे ।
जे अवतारी जगतमां । सरि उधारि सोअे ।।

राम ने तजी अन्य देवनी सेवा कोइ करशो नही, केम के जे ( राम) जगतमां अवतार लेनारा छे ते ज अंते आपणने उध्धारशे.

सरम करताथीं सरम । के अकरम करंम ।
थां गाडुं दीठा थकां । पग थाका अपरंम ।।

आज लजवंता पण मने लाज आवी छे, मारां केटलाय पापी कामनां कमोॅ छे , पण हे परमेस्वर , तारु गाडुं जोयाथी हवे मारा पगो थाकी गया छे .

पग साजे अपरमपर । जगविह आवि जोअे ।
लष चुरासी लांगडि । आवागमण न होअे ।।

जगत वच्चे आवी ने जोतां परमेस्वर नां चरणों रूप साधन वडे ओ लागींदास ! चौरासी लाख योनीओमां पुनः आवागमन थवानुं नथी रहेतुं .

नज चुमु फरिउ नही । भागल पगे भगत ।
देअल फरिआ भगत दस । अे अवगति वगति ।।

भक्त अेवो चुमोजी चारण के जेना पगों भागीं गया हता, ते पोते देवल नी दीशामां फयोॅ नहीं , पण देवल ज भगतनी दिशामां फयुॅ . आ पृभु नि पिछाण छे.

चुमु गोदड ईसर चवि । नरसी तंमरनाद ।
नामिं तरिआ नांमदे । पिृषत धृु पिृहलाद ।।

चुमो ,गोदडजी , इसरदास कहीअे, वळी तंबुरानो नाद गजवता नरसिंह महेता; परिक्षीत,धुृव , पृहलाद अने नामदेव जेवा भकतो पृभु नाम वडे तरी गया .

सरता दाता पाल सत। कडतल रूप करन ।
हर भगति वजपालहर । वरतावन षट वृन ।।
ओखा - हरण
लागींदास महेडु ( गोलासण)

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Friday, 4 August 2017

हणूंतसिंह मेहडू

📎📎📎📎📎
"क्रांतिवीर चारण कवि शंकर दान सामोर "
🌺🌺🌺🌺🌺

*संकरीये सामोर रा*
*गोळी हन्दा गीत*
*मिंतर साचा मुलक रा*
*रिपुंवा उलटी रीत*

आजादि से पहले जिन मामूली लोगों को बोलने का हक नहीं था उनकी आवाज को वाणी दी शंकर दान समोर ने और उस वाणी को लोगों के कानों तक पहुंचाई , जब कहने सुनने से काम नहीं चलता दिेखा तब शंकर दान सामोर आगे वान हुए, लोगों को नया रास्ता बताया राज और समाज की लड़ाई में खुलकर आ गये .सत्याग्रह धरना की मांजल को पार करते करते शंकर दान  सन 1857 के महा संग्राम तक पहुंचे |
शंकर दान गोरी सत्ता के विद्रोही विप्लवी क्रांतिकारी कवि थे उनकी कविता में अंग्रेजो के खिलाफ राजस्थान के लोगों के मन में रोष को विस्फोट के रूप में प्रकट करने की क्षमता थी वह कवि के रूप में देश पर आए हुए अंग्रेजी गुलामी के संकट से समाज को सूचित करते हुए युग चारण के रूप में समाज की रखवाली करने में पीछे नहीं रहे सन 18 57 के स्वतंत्रता संग्राम में नए नए आयामों की ओज भरी ऐसी निडर अभिव्यक्ति दी कि लोगों ने उन्हें "सन सत्तावन का कवि" कहकर सम्मान दिया | राजस्थान में सबसे पहले अंग्रेजों के सामने पांव रोकने वाले जो जंवामर्द थे बठोठ पाटोदा सीकर के डूंगर जी जवार जी . डुंगजी को आगरा की जेल तोड़कर छुड़ाने में जो वीर  थे वह खुमाण सिंह लोडसर कान्हा सिंह मलसीसर ,जोर सिंह मीणा उजीण सिंह मिगणा  धाहरा मेहडू साखा  के चारण हणूंत सिंह भोमसिंघोत , चतुर सिंह नरुका और करण मीणा बालों खवास इत्यादि थे . आगरा की बेड में उजीण सिंह और हणूंत सिंह मेहडू काम आये .
उनकी याद में शंकर दान जी सामोर  के कहे हुए मर्सिए आज भी कोढ़ से कहे और सुने जाते हैं *चितकर  सूरज चलेह* *गढवी गढ़ भेळर  गियो*

*मेहडू राण मिलेह*
*एकर हणूंत आवजे*

संग 1857 के युद्ध में संपूर्ण देश मे अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वालों में महावीर *तात्या टोपे* ही था ,उस महावीर तांतिया को अपनी मुसीबत के समय जो मदद शंकर दान सामोर ने कि वह इतिहास में सोने के अक्षरों में लिखी जाएगी . चारों ओर से निराश तात्या टोपे मदद की आस में शेखावाटी की तरफ आया मदद के भरोसे लक्ष्मणगढ़ के किले में गिर गया लक्ष्मणगढ़ के किले से छूटते ही कहीं पर मदद नहीं मिलती देखी तो शंकर दान बोबासर नें पृथ्वी सिंह सामोर के गढ में लाकर गढवी पण  की लाज रखी और तांतिये को इज्जत के साथ दक्षिण में पहुंचाया  उनके सहयोगी सिपाहियों को बीकानेर के राजा से छुड़ाकर सच्चे अर्थों में शरणाई साधार कहाया.प्रो.भंवर सिंह सामोर ने अपनी पुस्तक मे लिखा है कि, क्रोध में आए अंग्रेजों ने गढ़ को बारूद से उड़ा दिया आज भी धर कोठ की बाढ को खोदते वक्त तोपों के गोले निकलते हैं इस प्रकार शंकरदान  के गौरो के साथ  विरोधी की घमसान में सबसे ज्यादा कीमत उनके बड़े बाप के बेटे भाई पृथ्वीसिंह सामोर ने चुकाई.

महेन्द्र सिंह चारण
चारणाचार पत्रिका

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Thursday, 3 August 2017

कवि री बात राखण नै, कियो जैसलमेर माथै हमलो

*कवि री बात राखण नै, कियो जैसलमेर माथै हमलो*

बीकानेर रा राव लूणकरणजी वीर, स्वाभिमानी अर उदार नरेश हा। केई जंगां में आपरी तरवार रो तेज अरियां नैं बतायो तो दातारगी री छौल़ा ई करी। राव लूणकरणजी रै ई समकालीन कवि हा लालोजी मेहडू। बीकानेर रा संस्थापक राव बीकैजी रै साथै आवणियां में एक मेहडू सतोजी ई हा। इणी सतोजी रा बेटा हा लालोजी मेहडू। सतोजी नै राव बीकाजी खारी गांव दियो।लालोजी मेहडू आपरी बगत रो मोटा कवि अर बलाय रो बटको हा।

एकर लालोजी जैसलमेर गया। जैसलमेर रावल देवीदासजी, बीकानेर राव लूणकरणजी रा हंसा उडाया अर आवल़िया बकिया। लूणकरणजी रा हंसा सुण र लालैजी नैं रीस आयगी बां कैयो कै “हुकम म्है चारण हूं अर एक चारण रै आगै आप रावजी रा हंसा उडावो अर ओछा बोलो सो सौभै नीं। पछै लूणकरणजी तो खाग रा धणी है जे ठाह लागो तो कावल़ हो सकै सो आप माठ करो।” आ सुण र रावल़ देवीदासजी नैं बंब आयगी बां कैयो “बाजीसा जे रावजी म्हारै नव री तेरै करै तो करण दिया। इता ई जे खावणा है तो खावण दिया। जैसलमेर री जितरी जमीन में रावजी आवैला उतरी जमीं म्है बामणां नैं दान दे दूंला।”

लालोजी उठै सूं सीधा बीकानेर आया। रावजी नैं मुजरो कियो पण मूंडै माथै दोघड़ चिंता। रावजी पूछियो “कहो माडधरा रा समाचार ! कांई गल़्लां है उठै री?” लालैजी पूरी बात विगत वार बताई। सुणतां ई रावजी रा भंवारा तणग्या। मूंछां माथै हाथ देय बोलिया “तो ओ म्हारो नीं म्हारै कवि रो अपमान है अर म्हारै हाथ में जितै मूठ है उतरै आपरी बात खातर ओ सीस हाजर है। दयाल दास संढायच आपरी ख्यात में लिखै “तद रावजी लूणकरणजी फुरमायो कै लालाजी, रावल़जी कही है, तौ हूं आप जासूं थे राजी रहौ।”

रावजी आपरै जोगतै सिरदारां साथै चढिया सो लूटपाट करतां थकां गड़सीसर जाय आपरा घोड़ा पाया। दोनां कानी राटक बाजियो जिण में रावल़ देवीदासजी रा पग छूटा पण बीदावत सांगैजी जाय पकड़ लिया अर रावजी आगै हाजर किया। रावजी लालैजी नैं बुलाया। लालैजी आय, रावल़जी सूं मुजरो कियो अर कवित्त सुणायो जिणरो भाव ओ हो कै अबै जितरी जमीन महाभड़ लूणकरण जीती है बा सगल़ी बामणां नै दान करदी जावै। छप्पय री छेहली ओल़ियां –

*खुर रवद खैंग खेहां रमण ,घड़सीसर घोड़ा घणा।*
*धर देह परी नवगढ धिणी ,बांवल़ियाल़ी बांभणां।।*

लालैजी एक गीत ई रावल़जी नैं सुणायो। जिणरो एक अंतरो –

*देद कुवधचो भेद दाखियो*
*झूठो कियो कवि सूं झोड़।*
*मेहडू तणै बोल रै माथै*
*रातैगढ आयो राठौड़।।*

रावल़जी लचकाणा पड़ग्या। छेवट लालैजी रै कैणै सूं दोनां नरेशां बिचाल़ै संधी होई अर इण संधी में रावजी रै दो कंवरां नै रावल़ देवीदासजी आपरी बेटियां परणाई। सेना रो खरचो ई भरियो।

~~गिरधर दान रतनू “दासोडी”

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पेढ़ीनामा साता (मुळ गाम-राठी, पारकर, पाक) महेडु परिवार

*पेढ़ीनामा साता (मुळ गाम-राठी, पारकर, पाक) महेडु परिवार⤵*
                 *करशनजी*
                       ⬇
                 *खेगारजी*
                       ⬇
                  *अमरोजी*
                       ⬇
                *मेघराजजी*
                       ⬇
                 *रायघरजी*
                       ⬇
                 *जीवणजी* 
                       ⬇
                *खेतसिंहजी*
       ________⬇ __________
      |  |                                |  |
     ⬇                                ⬇
सादुळसिंहजी            *हिगोलदानजी*
     ⬇                                ⬇      
रामसिंहजी                   *जयसिंहजी*
     ⬇                                ⬇
हरसिंहजी                     *प्रभुदानजी*
     ⬇                                ⬇
मोहनजी➡(इनके|    *बीजलदानजी*
     ⬇        |दूसरे|               ⬇
बेचारोंजी |भाई-मोतीजी)  *खेतजी*
     ⬇                                ⬇
     ⬇                        *वालदानजी*
     ⬇                                ⬇
     ⬇                        *निम्बदानजी*
     ⬇                                ⬇
     ⬇➡⤵         *आवड़दान* तरला
               ⬇
1.तंगदानजी, 2.मोहब्तदानजी, 3.खेतदानजी, 4. आईदानजी
------------------------------------

.             *1.तंगदानजी​​*
                        ⬇
1.भुरदानजी, 2.जोवाहरदान, 3.गेंनदानजी, 4.महादानजी.

.              ​2.मोहब्तदानजी​​
                       ⬇
1.राणीदानजी,        2.सरदारदानजी

              ​3.खेतदानजी​​
                      ⬇
                   दो पुत्री

.             ​​4.आईदानजी​​
                      ⬇
1.चेनदानजी,   2.हेमदानजी.  3.लालदानजी
------------------------------------

.             ​​1.भुरदानजी​​
                     ⬇
1.विरधदानजी, 2.ईश्वरदानजी, 3.जीतूदानजी

.         ​2.​जोवाहरदान​​
                   ⬇
1.रासदानजी, 2.हरदानजी, 3.गोरधनदानजी, 4.सेणीदानजी

.          ​​3.गेंनदानजी​​
                  ⬇
1.वीरमदानजी, 2.देवीदानजी 3.नरपतदानजी,

.          ​4.महादानजी​​
                    ⬇
                एक पुत्री
------------------------------------

.            1.राणीदानजी​​
                      ⬇
              1.सूरतदानजी

             ​​2.सरदारदानजी​​
                      ⬇
1.लक्ष्मणदानजी, 2.सक्तिदानजी
------------------------------------

.              ​​1चेनदानजी​​
                      ⬇
1.मंगलदानजी, 2.मोरारदानजी, 3.पीरदानजी

.             ​​2.हेमदानजी​​
                     ⬇
1.मघदानजी,      2.छगनदानजी

.            ​3.लालदानजी​​
                    ⬇
1.निम्बदानजी, 2.हकमीदानजी, 3.अम्बादानजी
-------------------------------------

.          ​1.विरधदानजी​
                    ⬇
1.वेणीदान, 2.जयेशदान, 3.देवीदान

.             ​2.ईश्वरदानजी​
                    ⬇
1.नरपतदान,     2.बाबुदान

.          ​3.जीतूदानजी​
                   ⬇
               एक पुत्री
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.          ​1.रासदानजी​
                  ⬇

.          ​2.हरदानजी​
                  ⬇
1.गोविन्ददान, 2.मुकेशदान, 3.दलपतदान, 4.अमरदान

.        ​3.गोरधनदानजी​
                  ⬇
1.रविंद्रदान.    2.सैणीदान

.         ​4.सेणीदानजी​
                  ⬇
1.स्वरूपदान,    2.हितेशदान
------------------------------------

.        ​1.वीरमदानजी​
                  ⬇

           ​2.देवीदानजी​
                  ⬇
              पृथ्वीदान

           ​3.नरपतदानजी​
                   ⬇
------------------------------------

.        ​1.सूरतदानजी​
                  ⬇
1.सावलदान,  2.कैलाशदान
        ⬇
     एक पुत्री
-----------------------------------

.          1.लक्ष्मणदानजी​
                    ⬇  
1.महेशदान,       2.भवरदान

            2.सक्तिदानजी​
                   ⬇
1.स्वरूपदान,     2.जीतूदान
------------------------------------

.          ​1.मंगलदानजी​
                  ⬇
1.गोरधनदान,    2.मुकेशदान

          ​2.मोरारदानजी​
                  ⬇
1.राणीदान,   2.मुकेशदान

           ​3.पीरदानजी​
                 ⬇           
1.रमेशदान 2बाबूदान 3.मनोजदान 4.विक्रमदान 5.राघवदान
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.          ​1.मघदानजी​
                  ⬇
1.सैणीदान     2.करणीदान

.          ​2.छगनदानजी​
                  ⬇
1.स्वरूपदान,  1.जीतूदान
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.         ​1.निम्बदानजी​
                   ⬇
1.प्रतापदान 2.मनोहरदान 3.जबरदान

.          ​2.हकमीदानजी​
                    ⬇
                पाँच पुत्री

.           3.अम्बादानजी​
                    ⬇
1.दिलीपदान,    2.स्वरूपदान
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​साता में महेडु परिवार में काकू सा जीतूदानजी (मघदानजी) भाई सामलदानजी और भाई रमेशदान की बस हमारे बीच उनकी यादे ही रह गई है, जो अपनी कम उम्र में ही हमारे बीच से चल बसे भगवान उनकी आत्मा को सांती प्रदान करे,​

​1. जीतूदानजी/भुरदानजी महेडु इनके एक पुत्री है,
जन्म तारीख-​
​स्वर्गवास तारीख-​

​2.सामलदान/सूरतदानजी महेडु इनके एक पुत्री है
जन्म तारीख-​
स्वर्गवास तारीख-​

​3.रमेशदान/पीरदानजी जो की स्कूल के दिनो में बालोतरा में पढ़ाई करते करते महेडु भाइयो का साथ छोड़ चले अपनी कम उम्र में ही -
जन्म तारीख-​ 19.01.1991
स्वर्गवास तारीख-​ 05.09.2009
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​और कुछ महत्तपूर्ण जानकारी⤵​

​​1.बेचरोजी महेडु विसे जानकारी​​

इनके चार पुत्र उनके नाम- 1.तंगदानजी, 2.मोहब्तदानजी जो सबसे बड़े थे, 3.खेतदानजी, 4. आईदानजी,
इनके पुत्री- नही थे
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- चूड़ियो पाक में और अभी कपुरासी कच्छ (खड़िया)
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​1.तगदानजी महेडु विसे जानकारी​​
  ⬇
इनके चार पुत्र उनके नाम-1.भुरदानजी, 2.जोवाहरदान, 3.गेंनदानजी, 4.महादानजी.
इनके पुत्री- चार
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- चारणोर पाक और अभी  बीजासर (देथा)

​2.मोहबतदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके दो पुत्र उनके नाम- 1.राणीदानजी,          2.सरदारदानजी
इनके पुत्री- तीन
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- रोयळ पाक और अभी आनंदगढ़ बीकानेर (घुवड़)

​3.खेतदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके पुत्री- दो पुत्री
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- राठी मईयो की ढाणी पाक (मईया)

​4.आईदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके तीन पुत्र उनके नाम- 1.चेनदानजी,   2.हेमदानजी.  3.लालदानजी
इनके पुत्री- दो
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- 'ममाणा', 'मिसण'
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​1.भुरदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके तीन पुत्र- 1.विरधदानजी, 2.ईश्वरदानजी, 3.जीतूदानजी
इनके पुत्री- दो
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- डीणसी पाक और अभी डेलीतलाई ('बारहठ')

​2.जोवाहरदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके चार पुत्र - रासदानजी- डेली तलाई रहते है अभी, 2.हरदानजी- साता, 3.गोरधनदानजी- मूलथर, 4.सेणीदानजी- डेलीतलाई रहते है,
इनके पुत्री- तीन
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- मईयो की ढाणी पाक (मइया)

​3.गेंनदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके तीन पुत्र जो तरला में हाल निवास-1.वीरमदानजी, 2.देवीदानजी 3.नरपतदानजी,
इनके पुत्री- दो
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- मीठड़ीया पाक और अभी गुंगा जैसलमेर (देथा)

​4.महादानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके पुत्री- एक पुत्री
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह- डीणसी पाक और अभी डेलीतलाई बीकानेर (बारहठ)
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​1.राणीदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके एक पुत्र- सूरतदानजी    
इनके पुत्री- एक
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-
इनका विवाह-  दो बार हुई है- पहले छाह पाक में और भी रोढीया (घुवड़),  देदळाई पाक और अभी कपुरासी (मिसण)

​2.सरदारदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके दो पुत्र- 1.लक्ष्मणदानजी, 2.सक्तिदानजी
इनके पुत्री- दो पुत्री,
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-16.03.2014
इनका विवाह- भीमावेरी पाक और अभी गणेशवाली बीकानेर (देथा)
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​1.चेनदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके तीन पुत्र- 1.मंगलदानजी साता, 2.मोरारदानजी भुज रहते है, 3.पीरदानजी साता,
इनके पुत्री- एक
जन्म तारीख-02.03.1937
स्वर्गवास तारीख-18.10.1998
इनका विवाह- भिमावेरी पाक और अभी पूगल (बारहठ)

​2.हेमदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके दो पुत्र- 1.मघदानजी साता, 2.छगनदानजी बालोतरा रहते है
इनके पुत्री- दो
जन्म तारीख-
इनका विवाह- चारणोर पाक और अभी बीजासर (देथा)

​3.लालदानजी महेडु विसे जानकारी​

इनके तीन पुत्र- 1.निम्बदानजी, 2.हकमीदानजी, 3.अम्बादानजी
इनके पुत्री- नही थे
जन्म तारीख-
स्वर्गवास तारीख-24.01.2012
इनका विवाह- भिमावेरी पाक और अभी गणेशवाली (देथा)
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​भाइयो भूल हेतू क्षमा और सुधार हेतु सुझाव आमन्त्रित- 9913083073​​👏👏​

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